हद यतर सहतय म भरतय ससकत क चतरण
Abstract
भारत विविधताओं का देश है-भौगोलिक, भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक। यहा यात्रा केवल स्थान परिवर्तन नही, बल्कि संस्कृति, समाज और चेतना की यात्रा मानी जाती हैं। भारतीय परंपरा में यात्रा को ज्ञान आत्मबोध और अनुभव का माध्यम माना गया हैं। प्राचिन काल में तीर्थयात्रा का विशेष महत्व हमारे भारत देश में था । उस काल में ऋषी-मुनी यात्राएँ करते थे, लेकिन उनकी यात्रा का उद्देश ज्ञानार्जन होता था, उपने अनुसार यात्रा केवल भौगोलिक भ्रमण नहीं बल्कि, राष्ट्र, संस्कृति और समाज को समजने की प्रक्रिया है। भारतीय संस्कृति में यात्रा को आत्मशुद्धी और साधना का साधन भी माना गया है। यात्रा के माध्यम से मनुष्य विभिन्न देशों-प्रदेशों, नागरी और ग्रामों के भुगोल, इतिहास और जीवन-शैली से परिचित होता हैं। यह ज्ञान पुस्तकों में पढे गये तत्थों से अधिक प्रभावशाली और स्थायी होता हैं, क्योंकि यह प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होता हैं।
Fields of Study & Subjects
Travel Writing and Literature
Religious Tourism and Spaces
Indian and Buddhist Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 28 January 2026