वलमक रमयण क बलकणड म शररम क लएपरयकत वशषण क वशलषणतमक अधययन

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Authors: जोशी डॉ. ओंकार शामसुंदर, महाजन डॉ. सुप्रिया आशिष, जोशी डॉ. नीलेश
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Abstract

वाल्मीकि रामायण के आरम्भ में ही महर्षि नारदमुनि द्वारा श्रीराम के गुणों का वर्णन है। बालकाण्ड के प्रथम सर्ग से श्रीराम का गुणवर्णन करनेवाले विभिन्न प्रकारके विशेषणों का प्रयोग किया गया है, जिनके द्वारा श्रीराम के जीवन को दृग्गोचर करने का प्रयास किया है। इस शोधनिबन्ध में उन सारे विशेषणों को सम्मीलित कर आङ्गिक, भावनिक, सामाजिक आदि निकषों पर वर्गीकरण कर विश्लेषण किया जा रहा है, जिसमें वाल्मीकि रामायणपर प्रातिभासिक राम की छबी एक मानव से लेकर परमात्मा तक किस प्रकार सार्थभूत है यह स्पष्ट हो जायेगा। विशिष्ट प्रसंग के,आधारके अनुसार वाल्मीकिद्वारा श्रीराम के लिए प्रयुक्त वैशिष्ट्यपूर्ण विशेषण और उनसे निर्देशित मनुष्यप्रवृत्तियां इन सभी का गभीर अध्ययन किया जा रहा है।

Fields of Study & Subjects

Indian and Buddhist Studies Classical Studies and Philology Cultural and Mythological Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
29 January 2026