वनद कमर शरवसतव क कवय-दषट : एक ममस

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Authors: प्रशांत जैन, विनोद कुमार श्रीवास्तव
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Abstract

विनोद कुमार श्रीवास्तव की कविता जटिल रचना-प्रक्रिया से गुज़रने के बाद ही काग़ज़ पर उतरती है। जीवन इतना जटिल है तो उसे प्रतिबिंबित करने वाली कविता की रचना-प्रक्रिया का जटिल होना स्वाभाविक ही है, हालांकि इसका अर्थ भाषा की जटिलता नहीं है। सरल-सामान्य शब्दों में भी एक सशक्त एवं सारगर्भित कविता रची जा सकती है जिसमें संवेदना एवं अनुभूति के झंझावात छिपे हों। इसीलिए कविता सिर्फ़ उतनी नहीं होती जितनी वह शब्द-रूप में दिखाई देती है। लिखे गए शब्दों के बीच अनलिखा भी बहुत होता है। इस अनलिखे को पढ़े-पहचाने बिना, यानी ‘रीडिंग बिटवीन द लाइंस’ के बिना कविता का पाठ पूरा नहीं हो सकता। लिखे को हम यदि स्थूल कहें तो अनलिखा सूक्ष्म रूप में उस लिखे का ही विस्तार होता है। विनोद कुमार श्रीवास्तव इसी अनलिखे के कवि हैं। उनकी कविता में लिखित शब्द अनलिखे को आधारभूत ढाँचा भर प्रदान करते हैं। विद्युत के किसी चालक की तरह वे अनुभूतियों के वाहक मात्र हैं। कलेवर में छोटी हों या बड़ी, उनकी कविताएँ निश्चित ही सीधी-सरल नहीं होतीं। अर्थ-निष्पत्ति के लिए पाठक को ध्यान एवं संवेदना का पर्याप्त निवेश करना होता है। इस लेख में विनोद कुमार श्रीवास्तव के कवित्व के विभिन्न पक्षों के विश्लेषण एवं मूल्यांकन के साथ ही उनके जीवन-दर्शन एवं समग्र काव्य-दृष्टि की मीमांसा करने का प्रयास किया गया है।

Fields of Study & Subjects

Poetry Analysis and Criticism Artistic and Creative Research Literature: history themes analysis

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
1 January 2026