कतरम मध क परभव म हद सहतय भमक, सभवनए और चनतय- ड.सनल गलबसग जधव हनद वभग, यशवत महवदयलय, नदड

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Authors: Sunil Jadhav
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Abstract

साहित्य समाज का दर्पण होता है और तकनीक उस दर्पण को नया आकार देने वाली शक्ति। आज हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ मनुष्य की बुद्धिमत्ता को मशीनी मस्तिष्क यानी 'कृत्रिम मेधा' (AI) से चुनौती मिल रही है। 21वीं सदी के इस दौर में हिंदी साहित्य केवल कागज़ और कलम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह कंप्यूटर के कीबोर्ड और मोबाइल की स्क्रीन पर नए रूप में उभर रहा है। एल्गोरिदम' और 'डेटा' के इस प्रवाह ने साहित्य के सूजन (लिखने), संपादन और उसे पाठकों तक पहुंचाने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। यह आलेख इस बात का विश्लेषण करता है कि कैसे कृत्रिम मेधा हिंदी साहित्य के लिए असीम संभावनाओं के द्वार खोल रही है और साथ ही मौलिकता व मानवीय संवेदनाओं के समक्ष कौन सी गंभीर चुनौतियाँ पेश कर रही है। क्या मशीन कभी मनुष्य की तरह भावपूर्ण कविता लिख पाएगी? आइए, तकनीक और साहित्य के इस अनूठे संगम को विस्तार से समझते हैं।

Fields of Study & Subjects

Literary and Philosophical Studies Literary Analysis and Cultural Studies Digital Humanities and Scholarship

Publication details

Journal / source
Knowledgeable Research A Multidisciplinary Journal
Publication date
31 January 2026
Language
HI