भरतय सवधन क सफलत और परसगकत

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Authors: अनिल संभाजी केंद्रे
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Abstract

भारतीय संविधान, विश्व का सबसे बडा लिखित संविधान, भारत की जटिल सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं को समाहित करने वाली एक गतिशील जीवन नींव है। 26 जनवरी 1950 को कार्यान्वित यह दस्तावेज़ विविधता में एकता, लोकतांत्रिक स्थिरता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में सफल रहा है, जैसा कि संविधान सभा के नेतृत्व विशेषकर डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान से प्रेरित है। इसकी सफलता लचीली संरचना, धर्मनिरपेक्षता, मूल अधिकारों-कर्तव्यों के संतुलन तथा 100 से अधिक संशोधनों के माध्यम से सिद्ध होती है, जो बदलते युग की मांगों जैसे, डिजिटल अधिकार और पर्यावरणीय चुनौतियाँ से तालमेल बिठाती है। फिर भी, संस्थागत कमजोरियाँ और कार्यान्वयन संबंधी बाधाएँ इसकी प्रासंगिकता पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं। यह शोध पत्र संविधान की ऐतिहासिक उपलब्धियों, समकालीन उपयोगिता तथा सुधार की आवश्यकताओं का मूल्यमापन प्रस्तुत करता है।

Fields of Study & Subjects

Public Administration and Governance Comparative constitutional jurisprudence studies Legal and Policy Issues

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026