Mahakumbah 2025 Ek Sanskritik Evam Adhyatmik Sangam : Ek Samaj Vaigyanik Adhyayan

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Authors: Dr. Ritwik Ranjan Singh, Dr. Ritwik Ranjan Singh
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Abstract

वर्तमान में संगम नगरी प्रयागराज में 144 वर्षों के पश्चात शुभ संयोग मैं आयोजित होने वाले महाकुंभ विश्व के सभी देश तथा समस्त जनमानस को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और साथ ही साथ अध्यात्म से जोड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है। इस महाकुंभ में न केवल देश के विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों से लोग पवित्र स्नान एवं ध्यान के लिए एकत्रित हो रहे हैं बल्कि विभिन्न देशों के लोग भी महाकुंभ में स्नान कर रहे हैं और हिंदू परंपरा के प्राचीन सनातन धर्म से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में महाकुंभ एक ऐसे सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रघटना का प्रतिनिधित्व कर रहा है जिसका साक्षी जगत का प्रत्येक व्यक्ति होना चाहता है। इसके माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति विभिन्न भाषा, धर्म ,जाति, समुदाय, लिंग से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता, एकता,सहिष्णुता,नैतिकता आदि मूल्यों का निर्वहन कर रहा है। वैश्विक स्तर पर भारत महाकुंभ के कारण अपनी एक अलग पहचान बना रहा है जो करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था का प्रतीक है। सामाजिक विरासत के रूप में यूनेस्को ने वर्ष 2017 में कुंभ मेले को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि की मान्यता प्रदान की है। महाकुंभ के द्वारा लोगों को न केवल सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास होता है बल्कि सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय संरक्षण में भी अहम योगदान होता है अर्थात महाकुंभ की महत्ता को हम राष्ट्र की एकता और अखंडता के प्रतिनिधि के रूप में भी सकते हैं। अतः महाकुंभ 2025 एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संगम के रूप में समस्त जनमानस के धर्म,अध्यात्म, संस्कृति आदि के रूप में प्रतिनिधित्व कर रही है।

Fields of Study & Subjects

Religious Tourism and Spaces Indian and Buddhist Studies Cultural and Mythological Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
3 February 2026
Language
HI