भरतय परपरक वसतर म परतक व रपकन क महतव
Abstract
भारत में धर्म, भूगोल, जलवायु और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर भिन्न-भिन्न प्रकार के वस्त्र धारण किये जाते हैं। वस्त्र अपने अविस्मरणीय रंगों, जटिल डिजाइनों, लोक परंपराओं के कारण अदुतीय बन गए हैं। डिज़ाइन अक्सर एक बीते युग की विभिन्न शैलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारतीय कारीगरों ने हमेशा पैटर्न में रूपांकनों के बीच की जगह के उचित उपयोग पर गंभीरता से विचार किया है। भारतीय वस्त्र कला मानव प्रयास के इतिहास में एक अनूठा अध्याय है। प्रत्येक रूपांकन का एक विशेष अर्थ होता है और इसे किसी विशिष्ट उद्देश्य को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। अच्छी कलाकृति, चाहे वह पेंटिंग हो, मूर्तिकला हो या कपड़े, सभी डिजाइन से शुरू होती है। इस शोध पत्र के माध्यम से भारतीय पारंपरिक वस्त्रों में प्रयोग किये जाने वाले प्रतीको व रूपांकनो का क्या महत्व हैं। इनका प्रयोग करके किन-किन प्रकार के वस्त्र बनाये जाते हैं इनका अध्यन किया गया हैं। वस्त्रो में अनेक प्रकार के नमूने बनाये जाते हैं। इन्हें 'मोटिफ' कहते हैं। कुछ प्रमुख परम्परागत मोटिफ जो आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं, जैसे बूटी, बूटा, कोनिया, बेल, जाल और जंगला, झालर आदि। यह शोध पत्र विशेष रूप से पारम्परिक साड़ीयो व रूपांकनो पर चर्चा करता हैं। साथ ही साथ रूपांकनो के इतिहास व वर्तमान बदलावों को भी उजागर करता हैं।
Fields of Study & Subjects
Fashion and Cultural Textiles
Crafts
Textile
and Design
Cultural and Mythological Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 1 January 2026