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Authors: डॉ- चेत नारायन पटेल, डॉ- बृजेश कुमार राय
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Abstract

सार इक्कीसवीं सदी की शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान-संचार तक सीमित न होकर विद्यार्थियों में चिंतनशीलता, सृजनात्मकता तथा समस्या-समाधान क्षमता का विकास करना है। पारंपरिक विद्यालयी शिक्षा में रटंत विद्या और परीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण के कारण इन क्षमताओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। इस संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी दस्तावेज के रूप में सामने आयी है। यह नीति अनुभवात्मक अधिगम, आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मक अभिव्यक्ति तथा बहुविषयक दृष्टिकोण पर बल देती है। यह पेपर एक विश्लेषणात्मक (कॉन्सेप्चुअल) अध्ययन है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों का विश्लेषण करते हुए यह स्पष्ट करना है कि किस प्रकार यह नीति विद्यालयी बच्चों में चिंतन और सृजनात्मकता के विकास में सहायक हो सकती है। अध्ययन में नीति-आधारित तर्कों, शैक्षिक सिद्धांतों तथा वैचारिक विश्लेषण के माध्यम से यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है कि यदि नीति का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए, तो यह विद्यालयी शिक्षा को अधिक सार्थक, सृजनशील और चिंतनपरक बना सकती है।मुख्य शब्द- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, चिंतन क्षमता, सृजनात्मकता, विद्यालयी शिक्षा, अनुभवात्मक अधिगम, मूल्य-आधारित शिक्षा

Fields of Study & Subjects

Creativity in Education and Neuroscience Education and Critical Thinking Development Educational methodologies and cognitive development

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026