सहरस जल क मधयमक सतर क वदयरथय क परयवरण शकष क परत अभवतत क तलनतमक अधययन

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Authors: डॉ.पुरुषोत्तम कुमार वत्स
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Abstract

सारांश पर्यावरण व्यक्ति की संपूर्ण कार्य-प्रणाली को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। इसके द्वारा समस्त मानवीय गतिविधियाँ एवं क्रियाकलाप प्रभावित होते हैं। जीवन में पर्यावरण की उपयोगिता के कारण इसे शिक्षा के विभिन्न स्तरों से जोड़कर बालकों में पर्यावरणीय जागरूकता एवं पर्यावरण के प्रति चेतना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।पर्यावरण में हो रहे निरंतर ह्रास को रोकने तथा इसे शुद्ध एवं कल्याणकारी बनाने हेतु शिक्षकों में पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास कर विद्यार्थियों में इसका समुचित समावेशन किया जा सकता है। शिक्षक समाज का एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटक है, जो अपने कार्य, व्यवहार एवं विचारों के माध्यम से समाज में नव-जागरण एवं चेतना का विस्तार करता है।प्राथमिक शिक्षकों की पर्यावरण के प्रति अभिवृत्ति के माध्यम से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जागरूकता की नींव रखी जा सकती है। इसी संदर्भ में प्रस्तुत अध्ययन द्वारा माध्यमिक विद्यार्थियों की पर्यावरण शिक्षा के प्रति अभिवृत्ति का मापन किया गया, जिसमें यह पाया गया कि उनकी अभिवृत्ति का स्तर सामान्य एवं न्यून है। इसके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि माध्यमिक विद्यार्थियों में पर्यावरण शिक्षा के प्रति सकारात्मक अभिवृत्ति विकसित करने हेतु सेवाकालीन प्रशिक्षण, पर्यावरण के विभिन्न तत्वों के प्रति जागरूकता, कौशलात्मक ज्ञान का विकास तथा विभिन्न पर्यावरणीय घटकों के प्रति सकारात्मक चिंतन विकसित किए जाने की आवश्यकता है।

Fields of Study & Subjects

Environmental and sustainability education Environmental Education and Sustainability Environmental Sustainability and Education

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
15 January 2026