डजटल यग म परमपरक कल क पनरतथन सचर क दषटकण स एक अधययन

Read full text
Authors: Sharma, Priyanka, Mahesh Kumar Mishra
Cited by: 0

Abstract

इस शोध पत्र के द्वारा भारतीय पारंपरिक कला पर डिजिटल युग के प्रभाव का विश्लेषण कर अध्ययन किया गया है, विशेषकर संचार, प्रामाणिकता और बाजारीकरण के परिप्रेक्ष्य में। डिजिटल माध्यमों ने कलाकारों को डिज़ाइन टैबलेट, कंप्यूटर कोड और सोशल मीडिया जैसे उपकरणों के माध्यम से पारंपरिक शैलियों में नवाचार और व्यापक अभिव्यक्ति का अवसर दिया है। फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म ने भौगोलिक सीमाओं को हटाकर भारतीय लोक कलाकारों को वैश्विक पहचान और आर्थिक अवसर प्रदान किए हैं, जैसा कि ‘वेव्स 2025’ जैसे आयोजनों में देखा गया। आईटोकरी (iTokri) जैसे ई- कॉमर्स प्लेटफॉर्म और यूनेस्को का ग्रामीण शिल्प और सांस्कृतिक केंद्र कार्यक्रम (RCCH) यह दर्शाते हैं कि डिजिटल संचार कलाकारों को प्रत्यक्ष बाज़ार पहुँच और आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान कर सकता है। हालाँकि, चुनौतियाँ भी समानांतर रूप से मौजूद हैं—“वायरल संस्कृति” का दबाव, प्रामाणिकता का ह्रास, और ऑनलाइन सामग्री की अधिकता के बीच गुणवत्तापूर्ण कला की पहचान की कठिनाई। भविष्य में एनएफटी(NFTs) और वीआर/एआर (VR/AR) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियाँ कला स्वामित्व, अनुभव और संरक्षण को नए आयाम देंगी। सरकारी नीतियों के साथ इन तकनीकों का एकीकरण पारंपरिक कला को अधिक टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।

Fields of Study & Subjects

Art Technology and Culture Cultural Insights and Digital Impacts Media and Digital Communication

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
1 January 2026