बहर क कष परसथतक वरधभस ह। एक और जह उततर बहर म हमलय स आन वल नदय क करण बढ क वभषक हत ह वह दकषण बहर म सख और जलसतर क समसय भ एक सथ दखत ह। बहर क वभनन जल क फसल चकर म भ अतर सफ झलकत ह- गपलगज म गनन, परणय म मकक, भगलपर म रशम और आम और नलद म सबजय। इस तरह क ववधत स भर बहर म एक 'कदरकत सचर मडल' परभव नह ह सकत। एक तरह क परसरण स पर रजय क कसन क समसयओ क समधन नह कय ज सकत। ऐस म समदयक रडय क 'हइपर-लकल' Hyper-local परकत अपन सरथकत सदध करत ह। समदयक रडय लगभग 10 स 15 कलमटर क कषतर तक परभव हत ह और यह उस खस समत कषतर क सकषम जलवय Micro-climate, मटट और सथनय समजक-आरथक मदद क सबधत करन म परभव ह सकत ह। बहर म समदयक रडय सटशन क वकस 2006 क समदयक रडय नत क बद स तज स बढ ह। वरतमन म वभनन एनजओ, कष वजञन कदर और शकषण ससथन कई समदयक रडय सटशन चल रह ह, ज कष क वकस म सहयक सदध ह रह ह ।

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Authors: Mahesh Kumar Mishra, Satyam Snehi, Dr. Kumar Rajyavardhan
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Abstract

बिहार की कृषि पारिस्थितिकी विरोधाभासी है। एक और जहां उत्तर बिहार में हिमालय से आने वाली नदियों के कारण बाढ़ की विभीषिका होती है वहीं दक्षिण बिहार में सूखे और जलस्तर की समस्या भी एक साथ दिखती है। बिहार के विभिन्न जिलों के फसल चक्र में भी अंतर साफ झलकता है- गोपालगंज में गन्ना, पूर्णिया में मक्का, भागलपुर में रेशम और आम और नालंदा में सब्जियां। इस तरह की विविधता से भरे बिहार में एक 'केंद्रीकृत संचार मॉडल' प्रभावी नहीं हो सकता। एक तरह के प्रसारण से पूरे राज्य के किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता। ऐसे में सामुदायिक रेडियो की 'हाइपर-लोकल' Hyper-local प्रकृति अपनी सार्थकता सिद्ध करती है। सामुदायिक रेडियो लगभग 10 से 15 किलोमीटर के क्षेत्रों तक प्रभावी होता है और यह उस खास सीमित क्षेत्र की सूक्ष्म जलवायु Micro-climate, मिट्टी और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने में प्रभावी हो सकता है। बिहार में सामुदायिक रेडियो स्टेशनों का विकास 2006 की सामुदायिक रेडियो नीति के बाद से तेजी से बढ़ा है। वर्तमान में विभिन्न एनजीओ, कृषि विज्ञान केंद्रों और शिक्षण संस्थान कई सामुदायिक रेडियो स्टेशन चला रही है, जो कृषि के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है ।

Fields of Study & Subjects

Climate change impacts on agriculture Agricultural Economics and Practices Agriculture Land Use Rural Development

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
6 February 2026