हस और बल शषण पर मडय क परभव क अधययन
Abstract
संसार में बहुत कम ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें शिक्षा में रुचि ना हो आजकल ही नहीं बल्कि प्राचीन काल से ही शिक्षा का प्रयोग चला आ रहा है आज के भारतीय समाज में शिक्षा का मुख्य कार्य व्यक्ति की आवश्यकता की पूर्ति करना है। शिक्षा मानवीय चेतना का वह सर्वांगीण विकास है और ज्योतिमय सुसंस्कृति पद है, जिसमें व्यक्ति का बहुमुखी विकास होता हैद्य शिक्षा किसी भी राष्ट्र का वह बिंदु है जिसके चारों ओर विकास का चक्र घूमता है, राष्ट्र के सामाजिक आर्थिक राजनीतिक आध्यात्मिक तथा मानवीय मानसिक विकास के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण हैद्य शिक्षा के बिना यह सब अधूरे हैं अर्थात शिक्षा वह क्रम है जिसके द्वारा राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव है। यह आवश्यक नहीं है कि शिक्षा केवल विद्यालय या अन्य संस्थाओं से ही प्राप्त की जाए बल्कि किसी भी रूप में कभी भी प्राप्त किया जा सकता हैद्य मनुष्य की तीन मूलभूत आवश्यकताओं रोटी, कपड़ा और मकान की पूर्ति के लिए मनुष्य कार्य करने के लिए प्रेरित होता है। प्राचीन काल में शिक्षा व्यवस्था जटिल थी गुरु-शिष्य परंपरा थी गुरु अपने शिष्यों को शारीरिक मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्तियों के विकास के लिए शिक्षा देता था इसके परिणाम स्वरुप समाज में रहने वाले सभी लोग शिक्षित नहीं हो पाए थे लेकिन आज की प्रचलित भारतीय शिक्षा का प्रारंभ ब्रिटिश ईसाई मिशनरियों द्वारा किया गया इनका उद्देश्य भारत में ईसाई धर्म का प्रचार करना तथा अंग्रेजों के व्यापार को बढ़ावा देना था।
Fields of Study & Subjects
Media Studies and Communication
Crime
Deviance
and Social Control
Journalism and Media Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 7 February 2026
- Language
- HI