करयरत महलओ क वरदध घरल हस: आधनक आरथक परवश और जडर भमकओ म परवरतन क परभव
Abstract
आधुनिक आर्थिक परिवेश में महिलाओं की बढ़ती कार्यभागीदारी ने पारिवारिक संरचना, सत्ता-संबंधों तथा पारंपरिक जेंडर भूमिकाओं में उल्लेखनीय परिवर्तन उत्पन्न किए हैं। जहाँ एक ओर महिला रोजगार को सशक्तिकरण, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक उन्नति का माध्यम माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह परिवर्तन कई परिवारों में तनाव, असंतुलन और संघर्ष का कारण भी बना है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य कार्यरत महिलाओं के विरुद्ध घरेलू हिंसा की समस्या का विश्लेषण करना तथा यह समझना है कि किस प्रकार बदलती आर्थिक परिस्थितियाँ और जेंडर भूमिकाओं में परिवर्तन इस हिंसा को प्रभावित करते हैं। अध्ययन में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि पितृसत्तात्मक मानसिकता, पुरुष वर्चस्व की भावना, आर्थिक नियंत्रण की प्रवृत्ति और पारंपरिक सामाजिक अपेक्षाएँ घरेलू हिंसा को बढ़ावा देती हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यरत महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का बोझ, कार्यस्थल का तनाव और पारिवारिक समर्थन की कमी स्थिति को और जटिल बनाती है। शोध यह भी रेखांकित करता है कि घरेलू हिंसा केवल व्यक्तिगत समस्या न होकर एक गंभीर सामाजिक और संरचनात्मक मुद्दा है, जिसका प्रभाव महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, कार्य-प्रदर्शन, आत्मसम्मान और पारिवारिक जीवन पर पड़ता है। निष्कर्षतः, अध्ययन जेंडर-संवेदनशील दृष्टिकोण, सामाजिक जागरूकता, प्रभावी कानूनी क्रियान्वयन और पारिवारिक सहयोग को घरेलू हिंसा की रोकथाम हेतु आवश्यक मानता है।
Fields of Study & Subjects
Intimate Partner and Family Violence
Gender
Labor
and Family Dynamics
Work-Family Balance Challenges
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 9 February 2026
- Language
- HI