परमचद क कहनय म दलत कसन

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Authors: प्रियंका बी. जवंजाल
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Abstract

हिन्दी साहित्य में हमें दलित भूमिहार किसान कम ही दिखाई पड़ते है। इसका मुख्य कारण है सामंतवादी व्यवस्था और जातिगत भेदभाव। जहां एक ओर वर्ण व्यवस्था ने दलितों को समाज में सबसे निचले स्तर पर रखा, वहीं सामंतवाद ने उन्हें कभी मजदूर से खेतिहर किसान बनने ही नहीं दिया। दलित किसानी में भूमिहीन किसान या खेतिहर मजदूर वर्ग का हिस्सा है जिसके पास ना जमीन है ना साक्षरता और ना ही जीवन यापन का कोई और तरीका उन्हें मालूम है, वे एक छोटे से जमीन के टुकड़े के सहारे जीते है। प्रेमचंद के हिन्दी साहित्य के सबसे प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार और विचारक थे। प्रेमचंद के प्राप्त साहित्य में उन्होंने कुल 298 कहानियाँ लिखी जिनमें से केवल 40 दलित जीवन पर आधारित रही। ऐसी ही एक कहानी है ‘बाँका ज़मींदार’ इस कहानी में ज़मींदार और बंजारे किसानों का सीधा संघर्ष है। इस कहानी में ज़मींदार के गुंडों को बंजारे किसान पराजित कर देते है और ज़मींदार खुद अपनी ज़मींदारी का अधिकार छोड़ देता है। ‘खून सफ़ेद’ नामक कहानी में अकाल और भूख से पीड़ित हिन्दू किसान का बेटा साधो जब बिस्किट और केले के मोह में पादरी के पीछे चल जाता है और चौदह वर्ष बाद पादरी बन कर लौटता है तब हिन्दू समाज उसे अछूत मानता है, और उसे वापस पादरी समाज में लौट जाने पर मजबूर कर देता है। ‘पशु से मनुष्य’ यह कहानी एक माली की है जिसका नाम दुर्गा है जिसे चोरी के अपराध में निकाल दिया जाता है। किन्तु जब वह प्रेमशंकर की सहकार्य की व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है तब वह भी मनुष्य के गुणों को दर्शाने लगता है। यदि व्यवस्था और स्वामित्व बदले तो पशु समान माली भी मनुष्य बन सकता है। ‘सवा सेर गेहूँ’ एक ऐसी कहानी है जिसमे एक गरीब किसान है और वह सवा सेर गेहूँ के चक्कर में सर जीवन गुलामी करता है और मरने के बाद भी उसे इस गुलामी से आज़ादी नहीं मिलती बल्कि उसका पुत्र पिता द्वारा लिए गए ऋण को उतारने पर मजबूर हो जाता है। ‘शूद्रा’ कहानी गौरा शूद्र की है, गौरा और उसके पति को एक बूढ़ा ब्राह्मण धोखे से मजदूर की तरह मॉरेशियस भेज देता है। वहाँ जा कर गौरा का पति उस पर शक करता है जिस कारण वह नदी में कूद कर अपनी जान दे देती है और उसके पीछे पीछे उसका पति भी नदी में कूद कर अपना जीवन समाप्त कर देता है। और अन्य की कहानियाँ है – ‘पूस की रात’, ‘घासवाली’, ‘कफ़न’, ठाकुर का कुआं’, ‘सद्गति’, ‘प्रेम का उदय’, आदि।

Fields of Study & Subjects

South Asian Studies and Diaspora Literature: history themes analysis Postcolonial and Cultural Literary Studies

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026
Language
HI