परसथतक आधरत कष और आईपएफट क भमक: सतत एव परयवरण अनकल खत क ओर

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Authors: रोहित कुमार सिंह1, दीपक कुमार जायसवाल1, कु. पूजा1, जय प्रकाश सिंह2, उत्कर्ष उपाध्याय3
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Abstract

पारिस्थितिकी आधारित कृषि एक ऐसी समग्र खेती प्रणाली है, जिसका मुख्य उद्देश्य उत्पादन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। यह पद्धति रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता को न्यूनतम करते हुए, जैविक विकल्पों जैसे जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक, फसल चक्र, मिश्रित खेती, और एग्रोफॉरेस्ट्री को अपनाने पर बल देती है। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार होता है, जलधारण क्षमता बढ़ती है, तथा फसलों की गुणवत्ता और पौष्टिकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। वर्तमान परिदृश्य में जब जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण, जल प्रदूषण और रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव गंभीर वैश्विक चिंताएँ बन चुकी हैं, तब पारिस्थितिकी आधारित कृषि एक टिकाऊ एवं समाधान-उन्मुख विकल्प के रूप में उभर रही है। इसी दिशा में कीटनाशी सूत्रीकरण प्रौद्योगिकी संस्थान (आईपीएफटी) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। संस्थान एक स्वायत्त सरकारी संस्था है जो कीटनाशक अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। संस्थान द्वारा ट्राइकोडर्मा, स्यूडोमोनास जैसे लाभकारी सूक्ष्मजीवों पर आधारित जैविक कीटनाशकों के अनुसंधान एवं फॉर्मुलेशन विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, संस्थान ने नीम आधारित कीटनाशक जैसे ई.सी., एस.सी. एवं टैबलेट आदि के उन्नत रूप विकसित किए हैं, जिनका अवशेष स्तर अत्यंत कम होता है और ये पर्यावरण के लिए पूर्णतः सुरक्षित हैं। इसके अतिरिक्त, सिट्रोनेला ऑयल आधारित बायो-फॉर्मुलेशन पर किए गए अनुसंधान ने प्राकृतिक कीट नियंत्रण के क्षेत्र में नए आयाम जोड़े हैं। संस्थान द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विकास कार्य और इंडस्ट्री-प्रायोजित ट्रायल्स न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से मजबूत हैं, बल्कि किसानों तक पर्यावरण-सुरक्षित तकनीक पहुँचाने में भी सहायक हैं। इस प्रकार, संस्थान का यह सतत् प्रयास प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में नवाचार और स्थायित्व की दिशा में एक उल्लेखनीय योगदान सिद्ध हो रहा है।

Fields of Study & Subjects

Plant and soil sciences Sustainable Agricultural Systems Analysis Agronomic Practices and Intercropping Systems

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
12 February 2026
Language
HI