समकलन रजनत म करपर ठकर क वचरधर: परभव और परसगकत

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Authors: आदित्य राज
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Abstract

प्रस्तुत आलेख कर्पूरी ठाकुर की वैचारिक परंपरा का गहन एवं समालोचनात्मक अध्ययन करते हुए समकालीन भारतीय राजनीति में उसकी निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। कर्पूरी ठाकुर भारतीय समाजवादी आंदोलन के ऐसे विशिष्ट नेता थे, जिन्होंने राजनीति को सत्ता-प्राप्ति का साधन न मानकर सामाजिक परिवर्तन और नैतिक उत्तरदायित्व का माध्यम बनाया। सामाजिक न्याय, समान अवसर, प्रशासनिक शुचिता तथा वंचित और हाशिए पर स्थित वर्गों के सशक्तीकरण को उन्होंने अपने राजनीतिक चिंतन के केंद्र में रखा। आलेख यह स्पष्ट करता है कि कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा मात्र ऐतिहासिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान पहचान-आधारित, विकासोन्मुख एवं कल्याणकारी राजनीति के लिए भी वैचारिक दिशा प्रदान करती है। पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, दलित एवं अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े प्रश्नों पर उनके विचार आज भी नीतिगत बहसो में सार्थक हस्तक्षेप करते हैं। विशेष रूप से समानता-आधारित आरक्षण की उनकी अवधारणा सामाजिक विषमताओं को कम करने का एक प्रभावी उपकरण मानी जा सकती है। शोध में यह भी प्रतिपादित किया गया है कि सरल जीवन–उच्च विचार, लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और नैतिक राजनीति जैसे सिद्धांत समकालीन राजनीति में नैतिक संतुलन एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।

Fields of Study & Subjects

Indian History and Philosophy South Asian Studies and Diaspora Public Administration and Governance

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026
Language
HI