गधवद आरथक दरशन : महल सशकतकरण क आधर

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Authors: प्रवीण नाहिद
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Abstract

महात्मा गांधी का “आर्थिक स्वराज” का दर्शन महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता के लिए एक मजबूत एवं प्रासंगिक आधार प्रस्तुत करता है। उनके स्वदेशी, कुटीर उद्योग, ग्राम स्वराज और ट्रस्टीशिप जैसे सिद्धांत सीधे तौर पर महिलाओं को घरेलू स्तर से लेकर सामुदायिक स्तर तक आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग दिखाते हैं। चरखा और खादी जैसे प्रतीकों के माध्यम से गांधी ने महिलाओं को घर में रहते हुए भी सम्मानजनक आजीविका का साधन दिया, जो आज के “गिग इकॉनॉमी” और “वर्क फ्रॉम होम” मॉडल का पूर्वसूचक था। आधुनिक संदर्भ में, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs), सूक्ष्म वित्त, मुद्रा योजना और डिजिटल उद्यमिता इसी दर्शन के जीवंत रूप हैं, जो महिलाओं को सामूहिक पूँजी निर्माण, ऋण की पहुँच और बाजार संपर्क प्रदान कर रहे हैं। इस प्रकार, गांधी का आर्थिक चिंतन न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दर्शन है, बल्कि लैंगिक आर्थिक न्याय के माध्यम से एक समावेशी और न्यायसंगत समाज के निर्माण का मार्गदर्शक भी है।

Fields of Study & Subjects

Indian History and Philosophy Social and Economic Development in India Microfinance and Financial Inclusion

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026
Language
HI