बहर वधनसभ चनव म लक-लभवन नतय एव महल मतदतओ क भमक
Abstract
प्रस्तुत शोध पत्र बिहार की समकालीन राजनीति में महिलाओं की बदलती भूमिका और चुनावी व्यवहार पर केंद्रित है। पारंपरिक रूप से बिहार की राजनीति जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, किंतु पिछले दो दशकों में 'लिंग' (Gender) एक स्वतंत्र और निर्णायक राजनीतिक श्रेणी के रूप में उभरा है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि नीतीश कुमार सरकार द्वारा लागू की गई 'शराबबंदी' (2016) और अन्य लोक-लुभावन नीतियों (जैसे मुख्यमंत्री साइकिल योजना और जीविका मिशन) ने महिला मतदाताओं को किस प्रकार एक संगठित 'वोट बैंक' में परिवर्तित किया है। शोध पत्र में गुणात्मक और मात्रात्मक विधियों का प्रयोग करते हुए यह पड़ताल की गई है कि इन नीतियों ने न केवल महिलाओं की मतदान भागीदारी (Voter Turnout) को बढ़ाया है, बल्कि उनकी राजनीतिक चेतना और 'एजेंसी' को भी मजबूती प्रदान की है। डेटा विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं का पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान करना बिहार में एक नए 'साइलेंट वोटर' के उदय का संकेत है। निष्कर्षतः, यह पेपर तर्क देता है कि शराबबंदी जैसी नीतियों ने सामाजिक सुधार के साथ-साथ राज्य और महिला नागरिक के बीच एक नया 'सामाजिक अनुबंध' (Social Contract) स्थापित किया है, हालांकि इसके कार्यान्वयन की चुनौतियां और राजनीतिक सीमाओं पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता है।
Fields of Study & Subjects
Gender Politics and Representation
Electoral Systems and Political Participation
South Asian Studies and Diaspora
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 31 January 2026
- Language
- HI