शकषण पशवर क मनसक तनव पर सव-कषमत बध क परभव: एक सहसबधतमक अधययन

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Authors: संगीता सिंह
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Abstract

यह शोध पत्र शिक्षकों की स्व-क्षमता बोध (आत्म-प्रभावकारिता) और उनके मानसिक तनाव (मानसिक स्वास्थ्य) के बीच अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है। शोध का मुख्य केंद्र यह समझना है कि शिक्षक का अपनी क्षमताओं पर विश्वास किस प्रकार उसके व्यावसायिक तनाव, भावनात्मक स्थिरता और समग्र मानसिक कल्याण को निर्धारित करता है। कार्यप्रणाली : प्रस्तुत अध्ययन में 384 शिक्षकों (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर) का एक उपयुक्त और प्रतिनिधि सैंपल लिया गया है। सैंपल का चयन स्तरीकृत यादृच्छिक नमूनाकरण विधि द्वारा किया गया ताकि विभिन्न शैक्षणिक स्तरों और लिंग का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। डेटा संग्रह के लिए मानकीकृत उपकरणों का उपयोग किया गया और प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण पियर्सन के सहसंबंध (Pearson’s r) और प्रतिगमन विश्लेषण (Regression Analysis) के माध्यम से किया गया। परिणाम: विश्लेषण के परिणामों से पता चला कि आत्म-प्रभावकारिता और मानसिक स्वास्थ्य के बीच उच्च स्तरीय सकारात्मक सहसंबंध (r = 0.68, p < .01) है। आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि आत्म-प्रभावकारिता शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य में लगभग 46% भिन्नता (Variance) की व्याख्या करती है। उच्च आत्म-प्रभावकारिता वाले शिक्षकों में कक्षा प्रबंधन और छात्र सहभागिता को लेकर आत्मविश्वास अधिक पाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनमें 'बर्नआउट' और 'मनोवैज्ञानिक संकट' के स्तर काफी कम दर्ज किए गए। निष्कर्ष: अध्ययन यह सिद्ध करता है कि शिक्षकों का मानसिक स्वास्थ्य काफी हद तक उनकी स्वयं की क्षमताओं के बोध (Self-perception) पर निर्भर करता है। निष्कर्षों के आधार पर यह अनुशंसा की जाती है कि शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप और 'सेल्फ-हेल्प' तकनीकों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों की आत्म-क्षमता को सुदृढ़ कर उनके मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

Fields of Study & Subjects

Student Stress and Coping Occupational Health and Burnout Stress and Burnout Research

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
31 January 2026
Language
HI