'गधड' कहन म मतशकत और सघरष क परतक : 'यड
Abstract
डॉ.सुनील गुलाबसिंग जाधव द्वारा रचित 'गोधड़ी' कहानी केवल एक वृद्ध महिला की मृत्यु की कथा नहीं है, बल्कि यह एक माँ के अदम्य साहस, बंजारा समुदाय के कठिन जीवन और गरीबी की मार के विरुद्ध मानवीय जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज है। कहानी की केंद्रीय पात्र 'याड़ी' (माँ) अस्सी वर्षों का एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर तय करके शांत हुई है। उनका जीवन 1972 के उस भीषण अकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसने इंसान को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया था। कहानी का शीर्षक 'गोधड़ी' (पुरानी चिंदियों से सिली रजाई) अपने आप में एक गहरा अर्थ समेटे हुए है। जैसे एक गोधड़ी पुराने कपड़ों के टुकड़ों को जोड़कर बनाई जाती है, वैसे ही याड़ी ने अपने जीवन के अभावों, दुखों और परिश्रम के टुकड़ों को जोड़कर अपने परिवार के लिए सुरक्षा की एक चादर बुनी थी। यह भूमिका इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे एक माँ ने अपने पति के देहांत के बाद अकेले सात सदस्यों की जिम्मेदारी उठाई और भूख के साथ हर रोज एक नई जंग लड़ी। यह आलेख याड़ी के उसी विराट मातृत्व और संघर्ष को समर्पित है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार मानना नहीं जानता। याड़ी के चरित्र और संघर्ष के विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आलेख निम्नलिखित बिंदुओं में प्रस्तुत है।
Fields of Study & Subjects
Short Stories in Global Literature
Literature: history
themes
analysis
Folklore
Mythology
and Literature Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 17 February 2026
- Language
- HI
- Document type
- Book chapter