सशल मडय और हद भष : उपयग, परभव तथ बदलव
Abstract
सोशल मीडिया ने हिंदी भाषा के स्वरूप, प्रयोग और प्रसार में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इंटरनेट और स्मार्टफोन की सुलभता के कारण सोशल मीडिया पर हिंदी बोलने और लिखने वालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) के साथ-साथ यूट्यूब और शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी सामग्री (Content) की मांग सबसे अधिक है। सोशल मीडिया ने ब्रज, अवधी, भोजपुरी और हरियाणवी जैसी हिंदी की बोलियों को भी मुख्यधारा में पहचान दिलाई है। साथ ही क्षेत्रीय भाषा के शब्द भी धड्ल्ले से प्रयुक्त हो रहे हैं| संवाद को सरल बनाने के लिए हिंदी और अंग्रेजी के मिश्रण का प्रयोग बढ़ा है। रोमन लिपि में हिंदी लिखना (जैसे: 'Aap kya kar rahe ho?') एक आम चलन बन गया है। 'वायरल', 'ट्रेंडिंग', 'लाइक' और 'शेयर' जैसे शब्द अब हिंदी शब्दावली का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। सोशल मीडिया की गति के कारण लोग लंबे वाक्यों की जगह छोटे शब्दों और इमोजी (Emoji) का उपयोग अधिक करने लगे हैं। अब कोई भी व्यक्ति अपनी बात हिंदी में लिखकर लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। इसने नए लेखकों और कवियों को मंच दिया है। सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी भाषी प्रवासी भारतीय अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और विदेशी लोग भी आसानी से हिंदी सीख रहे हैं। हिंदी कंटेंट राइटिंग, पॉडकास्टिंग और वीडियो इन्फ्लुएंसिंग के क्षेत्र में करियर के नए रास्ते खुले हैं। परिणामतः रोजगार के अवसर भी निर्माण हुए हैं| जल्दबाजी में लिखने के कारण वर्तनी (Spelling) और व्याकरण की उपेक्षा हो रही है। अतः व्याकरणिक अशुद्धियाँ बढ रही हैं| अभद्र भाषा का प्रयोग भी बढ रहा है | भ्रामक जानकारी तथा 'फेक न्यूज' का प्रसार तेजी से होता है, जो समाज के लिए चुनौतीपूर्ण है। सोशल मीडिया ने हिंदी को 'किताबों की भाषा' से निकालकर 'जनता की भाषा' के रूप में पुनः स्थापित किया है। हालांकि इसमें अशुद्धियाँ बढ़ी हैं, लेकिन इसकी व्यापकता और स्वीकार्यता ने हिंदी को एक वैश्विक डिजिटल पहचान दिलाई है। वर्तमान युग में हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त डिजिटल शक्ति बन चुकी है।
Fields of Study & Subjects
Digital Communication and Language
Linguistic research and analysis
Linguistic and Sociocultural Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 31 January 2026
- Language
- HI