आधनक भरत क नरमत – सरदर वललभभई पटल क कटनतक और परशसनक यगदन

Read full text
Authors: राहुल कुमार
Cited by: 0

Abstract

यह शोध पत्र सरदार वल्लभभाई पटेल के उन प्रयासों का गहन विश्लेषण करता है, जिनके कारण भारत एक अखंड राष्ट्र बन सका। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के समय देश के 562 टुकड़ों में बंटने का खतरा था। इस पत्र में पटेल की एकीकरण नीति, 'ऑपरेशन पोलो', भारतीय नौकरशाही के पुनर्गठन और संविधान निर्माण में उनकी भूमिका का परीक्षण किया गया है। यह अध्ययन सिद्ध करता है कि पटेल की यथार्थवादी सोच ने ही भारत को एक असफल राष्ट्र बनने से बचाया। जीवन परिचय: भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधान मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय राजनीति में प्रमुख व्यक्तित्व थे। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को नडियाद, गुजरात में हुआ था. वह महात्मा गांधी के अहिंसा और एकता के सिद्धांतों से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने आजादी के बाद रियासतों को भारत में मिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनके योगदान के कारण उन्हें भारत के लौह पुरुष और भारत को एकजुट करने वाले जैसे विभिन्न खिताब दिलाए। उनके योगदान और संघर्ष के सम्मान में सरदार पटेल की जयंती, 31 अक्टूबर को “राष्ट्रीय एकता दिवस” या राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2018 में, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” उन्हें गुजरात में समर्पित की गई थी। मरणोपरांत, सरदार पटेल को 1991 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न से सम्मानित किया गया। दुखद बात यह है कि 1950 की गर्मियों में उनके स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आई, जिससे घातक दिल का दौरा पड़ा। भारत के इतिहास और एकता पर अमिट प्रभाव छोड़ते हुए 15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हो गया।

Fields of Study & Subjects

Colonial History and Postcolonial Studies South Asian Studies and Diaspora South Asian Studies and Conflicts

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
24 February 2026
Language
HI