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Abstract
भारतीय ज्ञान परम्परा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परम्पराओं में से एक है। भारतीय सभ्यता की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और इस दीर्घ कालखंड में विकसित हुई। यह परम्परा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र जैसे-धर्म, दर्शन, विज्ञान, साहित्य, चिकित्सा, कला और समाज में समृद्ध विचारों और अनुभवों का अद्भुत संगम है। इस परंपरा का मूल भारतीय मनीषा की उस चेतना में निहित है,जो जीवन, ब्रह्मांड, आत्मा, धर्म, समाज, नैतिकता, कला, भाषा और सृष्टि के रहस्यों की गहराई से पड़ताल करती है। “वसुधैव कुटुम्बकम्”(सारा विश्व एक परिवार है)और “सर्वे भवन्तु सुखिनः”(सब सुखी हों)जैसे-विचार भारतीय चिंतन की वैश्विक दृष्टि को प्रकट करते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक और लोक केंद्रित रही है। इसमें जनजातीय भाषाओं(जैसे भीली, भिलाली, बारेली, गोंडी, संथाली, मुंडारी, हो, कोरकू आदि) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन भाषाओं के माध्यम से आदिवासी समाज ने अपने अनुभवजन्य ज्ञान, जीवन-दर्शन और प्रकृति-संवेदनशीलता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखा। जनजातीय भाषाएँ लोक साहित्य(लोकगीत, लोकगाथाएँ, लोककथाएँ, मिथक,कहावतें, अनुष्ठानगीत) के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण,वन-जीवन, कृषि, औषधीय ज्ञान, पशुपालन और जल-संरक्षण जैसे विषयों का व्यावहारिक ज्ञान संप्रेषित करती हैं। यह ज्ञान लिखित ग्रंथों से अधिक मौखिक परंपरा पर आधारित होने के बावजूद अत्यंत वैज्ञानिक, टिकाऊ और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल है। भारतीय ज्ञान परंपरा में जनजातीय भाषाएँ सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की वाहक हैं। इनमें सहअस्तित्व, सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और संतुलित जीवन का संदेश निहित है। अनेक धार्मिक-आध्यात्मिक मान्यताएँ, पर्व-त्योहार और अनुष्ठान इन्हीं भाषाओं में व्यक्त होकर भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाते हैं। समकालीन संदर्भ में जनजातीय भाषाओं का संरक्षण भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता के लिए अनिवार्य है। इस शोध पत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा में जनजातीय भाषाओं का योगदान का विश्वलेश्ण किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये भाषाएँ न केवल अतीत की धरोहर हैं, बल्कि स्थायी विकास, पर्यावरणीय संतुलन और समावेशी ज्ञान-निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।
Fields of Study & Subjects
Language and Culture
Linguistic and Sociocultural Studies
Linguistics and Language Studies
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 25 February 2026
- Language
- HI