आधनककरण और गरमण आरथक सरचन: कष पदधतय एव आय सरत म परवरतन क समजशसतरय वशलषण

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Authors: डॉ. गुन्जन त्रिपाठी
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Abstract

आधुनिकीकरण एक गतिशील सामाजिक प्रक्रिया है जिसके प्रभाव से ग्रामीण समाज की आर्थिक संरचना में व्यापक परिवर्तनों को देखा जा सकता है। परंपरागत रूप से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि पर आधारित रही है, किंतु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास, बाजार विस्तार, संचार साधनों की उपलब्धता तथा सरकारी योजनाओं के कारण कृषि पद्धतियों और आय स्रोतों में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पद्धतियों में हुए परिवर्तनों तथा आय स्रोतों के विविधीकरण का समाजशास्त्रीय विश्लेषण करना है। इस शोध में प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आंकड़ों का उपयोग किया गया है। प्राथमिक आंकड़ों में चयनित ग्रामीण परिवारों से साक्षात्कार एवं प्रश्नावली के माध्यम से तथ्य संकलित किए गए, जबकि द्वितीयक आंकड़े पुस्तकों, शोध पत्रों तथा सरकारी रिपोर्टों से प्राप्त किए गए। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि परंपरागत कृषि पद्धतियों के स्थान पर आधुनिक बीज, उर्वरक, सिंचाई साधन तथा मशीनों का प्रयोग बढ़ा है। साथ ही ग्रामीण परिवारों की आय अब केवल कृषि तक सीमित न रहकर मजदूरी, लघु व्यवसाय, सेवा एवं प्रवासन जैसे विविध स्रोतों पर निर्भर होती जा रही है। यह परिवर्तन न केवल आर्थिक संरचना को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सामाजिक संबंधों, जीवन स्तर, शिक्षा तथा ग्रामीण जीवन शैली में भी परिवर्तन ला रहा है। अतः आधुनिकीकरण ग्रामीण समाज में बहुआयामी परिवर्तन की प्रक्रिया के रूप में उभर रहा है।

Fields of Study & Subjects

Social and Economic Development in India Agriculture Land Use Rural Development Agricultural Economics and Practices

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
26 February 2026
Language
HI