वदयरथय क सखन क नरधरत करन वल ततव एक अवलकन

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Authors: डॉ सुभाष कुमार सुमन
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Abstract

विद्यार्थियों में सीखने के द्वारा हमारे व्यवहार मंे अपेक्षाकृत स्थायी किस्म के परिवर्तन अनुभवों के माध्यम से ही होते हैं। इनकी प्रकृति परिपक्वता की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होने वाले परिवर्तनांे से बिल्कुल भिन्न होती है। जो कुछ भी सीखने की प्रक्रिया के दौरान सीखा या उपार्जित किया जाता है वह उपार्जित व्यवहार ही होता है उसे जन्मजात नहीं कहा जा सकता। इस तरह सीखना या अधिगम को पुरी तरह से वातावरण की शक्तियों की ही देन समझा जाना चाहिए, वंशानुक्रम के फलस्वरूप जन्मजात नहीं। प्रश्न उठता है कि विद्यार्थियों का सीखना किस रूप में किन-किन वातारण के तत्वों से निर्धारित होता है। दूसरी ओर अधिगम का शिक्षण से भी गहरा रिश्ता होता है। जैसी शिक्षण प्रक्रिया अध्यापक के नेतृत्व में या उसके निर्देशन में संपन्न होती है, सीखने का स्वरूप भी बहुत कुछ वैसा ही होता है। अतः यह जानना नितान्त स्वभाविक हो जाता है कि वे ऐसे कौन से तत्व है जो विद्यार्थियों के सीखने तथा शिक्षण प्रक्रिया को निर्धारित करते है।

Fields of Study & Subjects

Learning Styles and Cognitive Differences Educational methodologies and cognitive development Psychology of Development and Education

Publication details

Publication date
15 February 2026
Language
EN