भष-परदयगक और कतरम बदधमतत: अवधरण, अनपरयग, चनतय एव भरतय परपरकषय
Abstract
भाषा प्रौद्योगिकी को भाषा विज्ञान एवं कंप्यूटर विज्ञान के अंतरानुशासनिक संगम के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो मानव भाषा को मशीन अनुकूल रूप में रूपांतरित कर संवाद, अनुवाद, शिक्षा एवं शोध में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है। प्राचीन भारतीय विज्ञान परंपरा से प्रेरित होकर आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता सक्षम प्राकृतिक भाषा संसाधन ने वाक् पहचान, मशीन अनुवाद, प्राकृतिक भाषा समझ (NLU) एवं जनन (NLG) जैसे अनुप्रयोगों को संभव बनाया है। संगणकीय भाषा विज्ञान के गणनात्मक मॉडलों से भाषा प्रौद्योगिकी उत्पादों का विकास हुआ है। भारत के बहुभाषी परिप्रेक्ष्य में BHASHINI जैसे राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्लेटफॉर्म भाषाई विविधता को डिजिटल सेवाओं से जोड़कर शासन, स्वास्थ्य, न्याय एवं शिक्षा में समावेशी पहुँच सुनिश्चित कर रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सक्षम भाषा प्रौद्योगिकी ग्रामीण-शहरी विभाजन को कम कर रही है, किंतु संदर्भ-बोध, सांस्कृतिक संवेदनशीलता, डेटा पूर्वाग्रह एवं भारतीय भाषाओं में उच्च गुणवत्ता डेटा की कमी प्रमुख चुनौतियाँ बनी हैं। इस मुख्य विषय का लक्ष्य मानव-मशीन संचार को सहज बनाने के साथ नैतिक, समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। भाषा प्रौद्योगिकी का भविष्य भाषाई-सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण के साथ तकनीकी नवाचार पर निर्भर करता है।
Fields of Study & Subjects
Natural Language Processing Techniques
Artificial Intelligence Applications
Speech and dialogue systems
Publication details
- Journal / source
- ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA)
- Publication date
- 28 February 2026
- Language
- HI