21व सद क भरत: बहभषकत और रषटर नरमण

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Authors: अशोक वी. सूर्यवंशी
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Abstract

भारत विश्व के सबसे अधिक भाषाई विविधता वाले देशों में से एक है। यहाँ बहुभाषिकता केवल भाषाओं की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पहचान और लोकतांत्रिक चेतना का आधार भी है। 21वीं सदी में वैश्वीकरण, तकनीकी विकास, शिक्षा सुधार और डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ बहुभाषिकता की भूमिका और अधिक व्यापक हो गई है। यह शोध आलेख भारत में बहुभाषिकता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, शैक्षणिक एवं सामाजिक महत्व, राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका, चुनौतियों तथा संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि यदि बहुभाषिकता को समान सम्मान, समावेशी नीतियों और तकनीकी सहयोग के साथ अपनाया जाए, तो यह भारत को एक सशक्त, समावेशी और एकीकृत राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Fields of Study & Subjects

Linguistic and Sociocultural Studies Multilingual Education and Policy Language and Culture

Publication details

Journal / source
ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA)
Publication date
28 February 2026
Language
HI