कतरम बदधमतत क मनव जवन पर परभव
Abstract
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधुनिक तकनीकी क्रांति का एक प्रमुख स्तंभ है, जो मशीनों को मानव-सदृश सोचने, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करता है। इस शोध पत्र में एआई की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए, इसके ऐतिहासिक विकास, समकालीन आवश्यकता तथा मानव जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का विश्लेषण किया गया है। एआई की अवधारणा मूल रूप से कंप्यूटर विज्ञान से जुड़ी है, जहां मशीनें डेटा से सीखकर कार्य करती हैं, जैसे कि मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग। इसका विकास 1950 के दशक से शुरू हुआ, जब एलन ट्यूरिंग ने ट्यूरिंग टेस्ट प्रस्तावित किया, और आज यह चैटजीपीटी जैसे जेनरेटिव एआई तक पहुंच चुका है। एआई की आवश्यकता आधुनिक समाज में दक्षता बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवा सुधारने और आर्थिक विकास को गति देने में निहित है। सकारात्मक प्रभावों में स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण शामिल हैं, जहां एआई रोग निदान को तेज करता है और जलवायु पूर्वानुमान में सहायता करता है। वहीं, नकारात्मक प्रभावों में रोजगार हानि, पूर्वाग्रह आधारित निर्णय और गोपनीयता का उल्लंघन प्रमुख हैं, जो नैतिक चुनौतियां पैदा करते हैं। इस पत्र में इन पहलुओं का गहन विश्लेषण किया गया है, जिसमें स्रोतों से प्राप्त तथ्यों को मूल रूप से संयोजित किया गया है। निष्कर्ष में, एआई को नैतिक रूप से नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि यह मानवता के लाभ के लिए कार्य करे। संदर्भ सूची में प्रमुख पुस्तकें और वेब स्रोत शामिल हैं, जो इस अध्ययन को मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
Fields of Study & Subjects
Ethics and Social Impacts of AI
Artificial Intelligence Applications
Impact of AI and Big Data on Business and Society
Publication details
- Journal / source
- ಅಕ್ಷರಸೂರ್ಯ (AKSHARASURYA)
- Publication date
- 28 February 2026
- Language
- HI