भमडलकरण, भरतय ससकत और हद : मशन 2047

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Authors: दीपक विश्वासराव पाटील
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Abstract

संक्षेपतः भूमंडलीकरण के समर्थक यह दावा करते रहे हैं कि, इससे विश्व व्यापार के माध्यम से देशों के संबंध मजबूत हुए, भाषाओं और संस्कृतियों की पहचान बढ़ी तथा जाति-धर्म-लिंग से ऊपर उठकर भाईचारा विकसित हुआ। किंतु इसके बावजूद यह भी स्पष्ट है कि भूमंडलीकरण ने विकासशील देशों की संस्कृति को गहरी चोट पहुँचाई है, मानव-मूल्यों का हनन हुआ है, परिवार-व्यवस्था व्यक्ति-केंद्रित होती गई है और परिणामस्वरूप व्यक्ति तनावग्रस्त होता गया है। इस प्रकार भूमंडलीकरण ने समाज में प्रचलित संस्कृति को कई स्थानों पर क्षरण की ओर धकेल दिया है। अतः यह कहा जा सकता है कि भूमंडलीकरण ने भारतीय समाज को अनेक रूपों में प्रभावित किया है और ये प्रभाव भारतीय समाज में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हैं। साथ ही, यदि भारत को मिशन-2047 के लक्ष्य तक पहुँचना है तो भूमंडलीकरण के दबाव के बीच हिंदी तथा भारतीय भाषाओं को तकनीक, शिक्षा, साहित्य, शासन और सामाजिक जीवन में निर्णायक स्थान देना होगा तभी सांस्कृतिक आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास संभव हो सकेगा।

Fields of Study & Subjects

Globalization and Cultural Identity Language and Culture Comparative and World Literature

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
28 February 2026
Language
HI