हनद सहतय म अकत लगक समनत और महल सशकतकरण

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Authors: सुनीलकुमार विठ्ठल पाटील
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Abstract

प्रस्तुत लेख लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के विविध आयामों का विश्लेषण करता है । लैंगिक समानता का अर्थ जाति, क्षमता या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव को समाप्त कर सभी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के समान अवसर सुनिश्चित करना है । प्राचीन भारत में महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त थे, किंतु महाभारत काल के पश्चात उनकी स्थिति में गिरावट आई और उन्हें शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया गया । लेख के अनुसार, महिला सशक्तिकरण एक सतत प्रक्रिया है जो महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर सुदृढ़ बनाती है । वर्तमान में भारतीय महिलाओं, विशेषकर दलित और गरीब वर्ग की महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है, जहाँ वे घर और बाहर दोनों जगह शोषण एवं हिंसा का शिकार होती हैं । सशक्तिकरण के लिए लेख में निम्नलिखित चार प्रमुख क्षेत्रों पर बल दिया गया है: आर्थिक सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं में बचत की प्रवृत्ति और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना । राजनीतिक सशक्तिकरण: चुनाव और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना । मानवाधिकार सशक्तिकरण: महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी गरिमा की सुरक्षा हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित करना । पंचायती राज सशक्तिकरण: 73वें संविधान संशोधन के तहत मिले आरक्षण के कारण ग्रामीण महिलाओं ने स्थानीय प्रशासन में असाधारण कार्य किया है, जिससे उनके नेतृत्व के प्रति बनी भ्रांतियां दूर हुई हैं ।

Fields of Study & Subjects

Gender and Feminist Studies South Asian Studies and Diaspora Literature: history themes analysis

Publication details

Journal / source
Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
Publication date
28 February 2026
Language
HI