कल म शरगर क उतपतत व नयक परमपर
Abstract
ब्रह्मा, विष्णु और महेश क्रमशः सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय के लिए उत्तरदायी है। लय का अर्थ है विनाश। यह शंकर का नियोजित कार्य है। लय एकरसता है। आदिमाया पार्वती ने समाधिस्थ भगवान के जीवन में विलास और लालित्य का संचार किया है। मैं इन अग्रणी नायक-नायिकाओं को ललित कलाओं के इन महारथियों को प्रणाम करती हूँ। कठोर और व्यावहारिक जीवन में सुंदर और जीवनोन्मुख सौंदर्यवादी नायिकाएँ आकर्षण और लय का निर्माण करती है। मैं उन नायिकाओं को प्रणाम करता हूँ जो जीवन और साहित्य में आनंद और विलास का निर्माण करती हैं। श्रृंगार रस का मूल उद्देश्य है सौंदर्य, प्रेम और जीवन के प्रति आकर्षण। पार्वती का शिव को समाधि से लौटा कर प्रेम और सौंदर्य में प्रवृत्त करना एक गहरा प्रतीक है। इससे संकेत मिलता है कि श्रृंगार रस केवल इंद्रियजन्य नहीं, बल्कि जीवनदायिनी, सृजनात्मक शक्ति है। श्रृंगार नायिका वह स्त्री है जो जीवन को सुंदर बनाती है, कला को चेतना देती है और प्रेम को सामाजिक और आध्यात्मिक रूप में विकसित करती है। त्रिदेवों के संदर्भ में बताया गया कि सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और महेश द्वारा होती है। पार्वती द्वारा समाधिस्थ शिव के जीवन में सौंदर्य और श्रृंगार का संचारइयह दर्शाता है कि श्रृंगार, सृजनात्मक ऊर्जा और जीवन के प्रति आकर्षण का प्रतीक है।
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Cultural and Mythological Studies
Art
Aesthetics
and Perception
Publication details
- Journal / source
- Zenodo (CERN European Organization for Nuclear Research)
- Publication date
- 1 January 2026
- Language
- HI