खल सहभगत म सवसथय दशओ क भमक : एक ववचन

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Authors: शारीरिक शिक्षा विभाग, सुजानगढ़ विश्वविद्यालय, अलवर, राजस्थान, विजेन्द्र सिंह सितोलिया, डॉ. अर्जुन सिंह पंवार
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Abstract

योग की परंपरा अत्यंत प्राचीन है और इसकी उत्पत्ति हजारों वर्ष पहले हुई थी। ऐसा माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई है, तभी से योग किया जा रहा है। प्राचीनतम धर्मों और आस्थाओं के जन्म लेने से काफी पहले योग का जन्म हो चुका था। योग विद्या में शिव को “आदि योगी” तथा “आदि गुरु” माना जाता है। भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारंभ माना जाता है। बाद में कृष्ण, महावीर, बुद्ध ने इसे अपनी-अपनी तरह से विस्तार दिया। “दैहिक, मानसिक और सामाजिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ होना ही स्वास्थ्य है।” “किसी व्यक्ति की मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से अच्छे होने की स्थिति को स्वास्थ्य कहते हैं।” स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन है। हमें सर्वांगीण स्वास्थ्य के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। स्वास्थ्य का अर्थ विभिन्न लोगों के लिए अलग-अलग होता है कि हम अपने जीवन में आने वाली सभी सामाजिक, शारीरिक तथा भावात्मक चुनौतियों का कठिनाइयों के साथ सामना करने में सक्षम हों।

Fields of Study & Subjects

Sports and Physical Education Studies Physical Activity and Health Physical education and sports games research

Publication details

Journal / source
INTERANTIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT
Volume
10
Issue
01
Pages
1–9
Publication date
12 January 2026