वदत दरशन क परकत: शकरचरय क अदवत मत एव बहदरणयक उपनषद क आलक म एक समकषतमक अधययन
Abstract
सार वेदांत दर्शन भारतीय दार्शनिक परंपरा की चरम उपलब्धि माना जाता है, जिसमें ब्रह्म, आत्मा और जगत के तात्त्विक स्वरूप का गहन विश्लेषण किया गया है। प्रस्तुत शोध-पत्र का उद्देश्य वेदांत दर्शन की प्रकृति का विस्तृत एवं समीक्षात्मक अध्ययन करना है। इस अध्ययन में शंकराचार्य के अद्वैत वेदांत को सैद्धांतिक आधार तथा बृहदारण्यक उपनिषद् को प्राथमिक श्रुति-स्रोत के रूप में ग्रहण किया गया है। साथ ही, दो प्रमुख द्वितीयक पुस्तकों के माध्यम से अद्वैत वेदांत की दार्शनिक व्याख्या, उसकी आलोचनाएँ एवं उसकी समकालीन प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह निष्कर्ष निकलता है कि वेदांत दर्शन की प्रकृति मूलतः अद्वैतवादी, ज्ञानप्रधान एवं मोक्षोन्मुख है, जो मानव जीवन को आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा प्रदान करती है। कुंजी शब्द: वेदांत दर्शन, अद्वैत वेदांत, शंकराचार्य, बृहदारण्यक उपनिषद्, ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Study and Philosophy of Religion
Indian History and Philosophy
Publication details
- Journal / source
- INTERANTIONAL JOURNAL OF SCIENTIFIC RESEARCH IN ENGINEERING AND MANAGEMENT
- Volume
- 10
- Issue
- 01
- Pages
- 1–9
- Publication date
- 18 January 2026