भरतय जञन परपर एव जवन मलय

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Authors: Chhatrasal Singh
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Abstract

भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्ध परंपराओं में से एक है इसका मूल उद्देश्य केवल बौद्धिक विकास नहीं बल्कि मानव जीवन को नैतिक , आध्यात्मिक और सामाजिक रूप से उन्नत बनाना रहा है । भारतीय चिंतन में जीवन को केवल भोग का साधन न मानकर साधना का माध्यम माना गया है ।इसी कारण भारतीय ज्ञान परंपरा जीवन मूल्यों की सुदृढ़ आधारशिला प्रस्तुत करती है भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल स्रोत वेद,उपनिषद,रामायण,महाभारत,गीता,बौद्ध एवं जैन दर्शन है । इस परंपरा में ज्ञान को केवल सूचना नहीं बल्कि आत्मबोध का माध्यम माना गया है । “सा विद्या या विमुक्तये” की धारणा यह स्पष्ट करती है की वही विद्या श्रेष्ठ है जो मनुष्य को बंधनों से मुक्त करें भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता इसकी गहन और व्यापक ज्ञान परंपरा है । इस परंपरा का लक्ष्य मात्र वैदिक उन्नति नहीं बल्कि मनुष्य के चरित्र और आत्मिक विकास का निर्माण करना है भारतीय दृष्टिकोण में जीवन को भोग की वस्तु न मानकर आत्मोन्नति का साधन समझ गया है ।

Fields of Study & Subjects

Cultural and Mythological Studies Indian and Buddhist Studies Philosophy and Historical Thought

Publication details

Journal / source
International Journal of Versatile Research and Analysis
Volume
4
Issue
1
Publication date
1 January 2026
Language
EN