The Utility and Importance of Hindi Language in the Global Context

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Authors: Suman Devi
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Abstract

सारांश भारत एक बहुभाषीदेश है, भारत में बोलने वालों की संख्या तथा भौगोलिक दृष्टि से हिंदी केंद्रीय महत्व की भाषा है। आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी हिंदी का वर्चस्व दृष्टिगोचर है। लगभग 80 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा प्रयोग की जानेवाली हिंदी भाषा ने संयुक्त राष्ट्रसंघ में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है। हिंदी भाषा की सरलता, सहजता व भाव अभिव्यक्ति की श्रेष्ठतम योग्यता के कारण मॉरीशस, त्रिनिदाद, फिजी, सूरीनामा, गुयाना आदि देशों में हिंदी का प्रयोग प्रवासी भारतीयों द्वारा किया जाता है। अमेरिका, फ्रांस, सूरीनामा, चीन, सूडान, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया आदि राष्ट्रों में हिंदी शिक्षा की विशेष व्यवस्था है। अमेरिका में लगभग 150 ऐसे शिक्षण केंद्र हैं जहाँ हिंदी का अध्ययन व अध्यापन करवाया जाता है। हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान करने में बहुराष्ट्रीय एजेंसियां, विज्ञापन चैनलों, उपग्रह चैनलों का विशेष महत्व है। हिंदी भाषा की प्रमुख विशेषता तथा इसके सर्वव्यापी बनने का प्रमुख आधार है। इसके संस्कृत के शब्दों उपसर्ग व प्रत्ययों के आधार पर नये शब्द गढ़ने की क्षमता है, जिसके परिणामस्वरूप ही हिंदी भाषा में उच्चकोटि का साहित्य विपुल मात्रा में पाया जाता है। हिंदी भाषा के पास लगभग 25 लाख से अधिक शब्दों का शब्दभंडार है। हिंदी भाषा को विश्व प्रसिद्ध बनाने व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में हिंदी पत्र-पत्रिकाओं का विशेष योगदान रहा है। हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विस्तृत करने में अनुवाद का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अनुवाद के द्वारा दूसरी भाषाओं में लिखित सामग्री को हिंदी भाषा के माध्यम से देश के बहुसंख्यक लोगों तक पहुंचाया जाता है। हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान विदेशी-प्रवासी भारतीयों का है जो लगभग 200 वर्ष पहले खेतिहर मजदूरों के रूप में विदेशों में अलग-अलग स्थानों पर पहुंचे थे। भारतीय मूल के लोग विदेश में जाकर वहीं के होकर रह गये तथा इन्होंने हमारी राजभाषा हिंदी को विदेशों में पहुँचाने का कार्य किया। दक्षिण अफ्रीका, सूरीनामा, त्रिनिदाद, फिजी, मॉरीशस आदि में अनेकों ऐसे भारतीय मूल के व्यक्ति मिल जाते हैं जिनके पूर्वज पांच-छह पीढ़ी पूर्व विदेशों में गये थे। इन प्रवासी भारतीयों ने हिंदी को सुदूर देशों में प्रसारित करने का कार्य किया है। मॉरीशस में प्रथम अखबार ‘हिन्दुस्तानी’ 1913 ई॰ में तथा प्रथम पत्रिका ‘दुर्गा’ नाम से प्रथम हस्तलिखित साहित्यिक व सांस्कृतिक पत्रिका प्रारम्भ हुई। आज हिंदी का ज्ञान अर्जित करने के लिए विद्यार्थियों की रुचियाँ व अभिरुचियाँ भी अलग-अलग हैं जैसे हिंदी साहित्य का अध्ययन अनुवाद के लिए, भाषा वैज्ञानिक अध्ययन, सभ्यता व संस्कृति का अध्ययन, योग व शिक्षणपद्धति का अध्ययन इत्यादि। विगत कुछ वर्षों से छात्र हिंदी विषय का अध्ययन करने के लिए विदेशों से भारत में आ रहे हैं। भारत कई स्थानों पर हिंदी शिक्षण के अध्ययन की व्यवस्था की गई है। भारतवर्ष में कुछ प्रमुख शिक्षण संस्थानों जैसे महात्मागांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी और दिल्ली विश्वविद्यालय आदि द्वारा भारत में विदेशी छात्रों को हिंदी पढ़ाने की विशेष व्यवस्था की जाती है। अंतर्राष्ट्रीय मंच पर हिंदी को स्वीकृति दिलवाने के लिए विश्व हिंदी सम्मेलन की शुरुआत हुई। 1975 ई॰ में प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी के नेतृत्व में भारत के नागपुर शहर में प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ। अब तक कुल 12 विश्व हिंदी सम्मेलन हो चुके हैं। विश्व हिंदी सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भी हिंदी भाषा का प्रसार-प्रचार तथा वैश्विक सन्दर्भ में हिंदी को समस्त जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से हुआ। प्रमुख शब्द: बहुभाषीदेश, अंतर्राष्ट्रीय, राजभाषा, प्रवासी भारतीय, सभ्यता व संस्कृति, विश्व हिंदी सम्मेलन।

Fields of Study & Subjects

Linguistic and Sociocultural Studies Language and Culture Multilingual Education and Policy

Publication details

Journal / source
Shodh Sari-An International Multidisciplinary Journal
Volume
5
Issue
01
Pages
27–33
Publication date
1 January 2026
Language
HI