दलत वरग क वकस म पचयत रज क भमक गन जल क सदरभ म (2001-2011)

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Authors: Vikas Yadav
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Abstract

यह शोधपत्र वर्ष 2001 से 2011 के मध्य गुना जिले में दलित वर्ग के सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक विकास में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 73वें संविधान संशोधन के पश्चात भारत में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को संवैधानिक आधार प्राप्त हुआ, जिसके अंतर्गत अनुसूचित जातियों को पंचायतों में आरक्षण प्रदान किया गया। अध्ययन 95 ग्राम पंचायतों तथा 153 उत्तरदाताओं में 52 दलित सरपंच एवं 101 सामान्य दलित नागरिक पर आधारित है। प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का सांख्यिकीय परीक्षण किया गया। निष्कर्ष दर्शाते हैं कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई तथा दलित नेतृत्व उभरा परंतु सामाजिक-आर्थिक स्तर पर परिवर्तन सीमित रहा। कृषि से मजदूरी की ओर झुकाव भूमिहीनता निम्न शैक्षिक स्तर एवं आधारभूत सुविधाओं की कमी विकास प्रक्रिया में बाधा बने रहे। अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि पंचायती राज व्यवस्था ने दलित वर्ग को राजनीतिक मंच तो प्रदान किया है किंतु समग्र सशक्तिकरण के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।

Fields of Study & Subjects

Social and Economic Development in India South Asian Studies and Diaspora Indian Economic and Social Development

Publication details

Journal / source
Advanced International Journal for Research
Volume
7
Issue
1
Publication date
21 February 2026
Language
HI