गरम-नगर अनतकररय एव गरमण गतशलतर एक समजशसतरय वशलषण
Abstract
भारत गाँवों का देश है इसकी अधिकांश जनसंख्या ग्रामों मे निवास करती है। ग्रामीण समाज पर विचार-विमर्श उतना ही प्राचीन है जितना कि स्वयं ग्रामीण समाज। प्रारम्भिक अध्ययनों के अनुसार ग्रामीण समाज को बन्द समुदाय के रूप में वर्णित किया गया जो आत्मनिर्भर है, जिसका बाह्य सम्पर्क न के बराबर तथा यह नगरीय समाज से भिन्न माना गया। किन्तु ग्रामीण एवं नगरीय समाज एक दूसरे के विपरीत नहीं है, बल्कि एक दूसरे के पूरक अवश्य कहे जा सकते है। ग्रामीण और नगरीय समाज गहन रूप से आपस में अंतरसम्बंधित है। ग्रामीण अध्ययनों के सूक्ष्म विश्लेषण से ज्ञात होता है कि ग्राम व नगर आपस में अन्र्तसम्बंधित है। नगरीकरण, प्रवजन, ग्रामीण नगरीय अंतर तथा ग्रामीण समाज में परिवर्तन के भी अध्ययन हुये है। कई आधार पर गांव सन्दर्भित होते रहे है तथा कई नये आधार भी ग्रामीण अध्ययनों में समाहित हो रहे है। समाजशास्त्रियों ने ग्राम के संरचनात्मक ढांचे का जातिगत् आधार पर अध्ययन किया तथा गांव के प्रत्येक पक्ष का अध्ययन प्रस्तुत किया है। नवीन सामाजिक प्रवृत्तियां शिक्षा, रोजगार, बेरोजगारी, गरीबी इत्यादि नये अध्ययन प्रश्नों पर भी व्यापक अध्ययन हो रहे है। प्रस्तुत शोध प्रपत्र उत्तर प्रदेश के लखनऊ जिले के बख्शी का तालाब ब्लाक में स्थित रूदही गांव के अध्ययन पर आधारित है। मजूमदार ने 50 के दशक में इस क्षेत्र का अध्ययन कर, इस क्षेत्र में अध्ययन की सार्थकता को सिद्ध किया था। शोध प्रपत्र का उद्देश्य ग्राम-नगर अन्तक्र्रिया के माध्यम से ग्रामीण जीवन में उत्पन्न गतिशीलता के नवीन आयामों को प्रस्तुत करना है। ग्रामीण समाज नगर से जुड़कर नित्य कुछ न कुछ ग्रहण करता है, यह ग्राह्यता ग्रामीण समाज में किस प्रकार के नये सन्दर्भो को उद्घाटित करता है? इस शोध प्रश्न को प्रस्तुत प्रपत्र में विश्लेषित किया गया है।
Fields of Study & Subjects
Social and Economic Development in India
Regional Socio-Economic Development Trends
Rural development and sustainability
Publication details
- Journal / source
- International Journal of Science and Social Science Research
- Volume
- 3
- Issue
- 4
- Pages
- 141–146
- Publication date
- 2 March 2026
- Language
- HI