ससकत सहतय म वसतर सनदरय ( करतरजनयम क वशष सनदरभ म)
Abstract
नारी सौंदर्य में चार चाँद लगाने में वस्त्रों का अपना ही महत्त्व है | प्रस्तुत शोध पत्र में संस्कृत साहित्य के प्रमुख काव्यों में वस्त्र सौन्दर्य के पुट को आधार मानकर यत्र-तत्र उद्धरण देते हुए लिखा है | इस शोध पत्र में महर्षि चरक के निर्मल वस्त्र धारण करने की सलाह को लिखा है | इसके साथ ही महाकवि कालिदास के ग्रन्थों में नायिकाओं के वस्त्रों के पुट भी दिखाई देते है | महाकवि भास ने ‘बालचरितम्’ में सीता को रंग-बिरंगे वस्त्रों में विहार करते हुए दिखाने का प्रयास किया है। ऐसे ही नाटय- शास्त्र में वेश तीन प्रकार के बताये हैं- 1. शुद्ध 2. विचित्र और 3. मलिन । इस शोध प्रबंध में वस्त्रोत्पत्ति के कारणों पर भी चर्चा देखने को मिलती है | प्रकरणानुसार महाकवि भारवि प्रणीत किरातार्जुनीयम् महाकाव्य के विशेष सन्दर्भ में वस्त्र सौन्दर्य का विस्तारपूर्वक वर्णन पढने को मिलता है |
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Fashion and Cultural Textiles
Classical Studies and Philology
Publication details
- Journal / source
- Devabhumisaurabham
- Volume
- 2
- Issue
- 2
- Pages
- 147–159
- Publication date
- 30 January 2026