वदक ऋषय क तपभम गढवल
Abstract
गढ़वाल क्षेत्र वैदिक ऋषियों की तपस्थली रहा है वैदिक ऋषियों ने नदियों के संगमों ,गिरी गह्वरो में अपने लिए तपस्या स्थल बनाए , इस क्षेत्र में ऋषि अंगिरा , दक्ष , महर्षिजमदग्नि, परशुराम ,वैदिक ऋषि नर- नारायण , ऋषि नारद , रुद्र, महर्षि अगस्त्य , महर्षि भरद्वाज ,आचार्य सुश्रुत ,महर्षि वेदव्यास आदि अनेकानेक ऋषियों ने इस पावन क्षेत्र को अपने दिव्यज्ञान से अभिषिंचित किया । प्रकृति की गोद में ध्यान, योग इत्यादि करते हुए अपनेआराध्य का चिंतन मनन तथा अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए अपनी शिष्य परंपरा के शिक्षण-प्रशिक्षण द्वारा अपने विचारों को चिर स्थाई बनाया । आज भी अनेकानेक स्थलों पर प्राचीन आश्रमों के अवशेष प्राप्त होते हैं तथा कुछ आश्रमों को हम परिवर्तित रूप में भी देख सकते हैं ये आश्रम भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा के मूल स्रोत हैं इन आश्रमों में शैव, शाक्त, वैष्णव,जैन, बौद्ध आदि भारतीय ज्ञान परंपराओं का सूत्रपात हुआ,इन सभी परंपराओं का मूल उद्देश्य सत्य की खोज एवं जीव मात्र के कल्याण की कामना रहा है। मनुष्य में मानवोचित गुणों का विकास हो वे भौतिक उन्नति के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति को भी प्राप्त करें यही इन तपस्थलियों अथवा आश्रमों का मुख्य उद्देश्य रहा है ।
Fields of Study & Subjects
Indian and Buddhist Studies
Religious Tourism and Spaces
Cultural and Mythological Studies
Publication details
- Journal / source
- Devabhumisaurabham
- Volume
- 2
- Issue
- 2
- Pages
- 196–203
- Publication date
- 30 January 2026
- Language
- HI