psychoanalytic study of transgender characters in Hindi novels
Abstract
हिन्दी उपन्यासों में किन्नर पात्रों की प्रस्तुति न केवल साहित्यिक संवेदना का विस्तार करती है, बल्कि समाज में हाशिये पर स्थित समुदायों की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक वास्तविकताओं को उजागर करने का माध्यम भी बनती है। यह अध्ययन किन्नर पात्रों के व्यक्तित्व, उनकी लैंगिक पहचान की तलाश, सामाजिक अस्वीकार्यता, आत्मसंघर्ष और मनोवैज्ञानिक द्वंद्व को मनोविश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करता है। सिग्मंड फ्रायड, कार्ल युंग जैसे मनोविश्लेषकों के सिद्धांतों के आधार पर यह विश्लेषण दर्शाता है कि कैसे किन्नर पात्र अपने मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में जीते हुए आत्मस्वीकृति की प्रक्रिया से गुजरते हैं। उपन्यासों जैसे नीला स्कार्फ, कोकिला, जिन्नात के बच्चे और मिट्टी की बारात में किन्नर पात्रों की भीतरी पीड़ा, अस्मिता संघर्ष और समाज से टकराव को गहराई से उकेरा गया है। यह शोध-पत्र इस दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है कि यह किन्नर समुदाय की आवाज़ को साहित्यिक विमर्श में स्थान देता है और उनके मानसिक संसार को समझने की एक गंभीर कोशिश करता है।
Fields of Study & Subjects
Literary Theory and Cultural Hermeneutics
Gender and Feminist Studies
Psychoanalysis and Social Critique
Publication details
- Journal / source
- Shodh Manjusha An International Multidisciplinary Journal
- Volume
- 03
- Issue
- 01
- Pages
- 122–130
- Publication date
- 5 January 2026