Indigenous knowledge traditions and farmers' movements from a multidisciplinary perspective: A study in the context of Haryana
Abstract
किसान आंदोलन भारतीय समाज और राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में उभरा है। हरियाणा, जोकृषि प्रधान राज्य है, वहाँ यह आंदोलन केवल आर्थिक और राजनीतिक विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने स्वदेशी ज्ञान परंपरा, ग्रामीण जीवन शैली, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक संरचना को भी प्रभावित किया। इस शोध का उद्देश्य बहुविषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach) से किसानआंदोलन और स्वदेशी ज्ञान परंपरा के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करना है। स्वदेशी ज्ञान (IndigenousKnowledge) में कृषि तकनीकें, परंपरागत खेती प्रणाली, जल संरक्षण, सामूहिक निर्णय-प्रक्रिया और ग्रामीण संचार माध्यम शामिल हैं। किसान आंदोलन ने इन परंपराओं को पुनर्जीवित किया तथा स्थानीयऔर राष्ट्रीय स्तर पर इनके महत्व को रेखांकित किया। समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान,पत्रकारिता और लोकसंस्कृति जैसे विविध शैक्षिक दृष्टिकोण इस अध्ययन को गहराई प्रदान करते हैं।परिणाम स्वरूप यह स्पष्ट होता है कि किसान आंदोलन न केवल कृषि संबंधी नीतियों के विरुद्ध प्रतिरोध काप्रतीक है, बल्कि यह स्वदेशी ज्ञान परंपरा और सामुदायिक एकता को मजबूत करने वाला सामाजिकआंदोलन भी है। इस प्रकार यह अध्ययन किसान आंदोलन के बहुआयामी प्रभाव को समझने में सहायक सिद्ध होता है।
Fields of Study & Subjects
Agriculture
Land Use
Rural Development
Indigenous Knowledge Systems and Agriculture
Social and Economic Development in India
Publication details
- Journal / source
- Shodh Manjusha An International Multidisciplinary Journal
- Volume
- 03
- Issue
- 01
- Pages
- 133–143
- Publication date
- 10 January 2026